औरत

चिंतन नारी, तुम नहीं अबला,आजाद हो तुम अब ।चीख-चीख कर कह रहे तमाम चैनल,मंत्री,संतरी और स्वयं तुम यही तो कह रही नारी दिवस पर,आयोजित वार्ताएं ।टीवी स्क्रीन पर एक से एक ताजातरीन,मुस्कराते चेहरे, चेहरों की नकल करते चेहरेऔर चेहरे, और जिस्मसच कहा तुमने,अब औरत आजाद है... [पूरी पोस्ट]
writer वंदना शुक्ला

औरत

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[13 Jun 2010 09:11 AM]

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