है अमा की रात
है अमा की रात तोदीपक जलाते बढ़ चलो।राह में है ठोकरे तोखुद हटाते तुम चलो। १।कब, कान्हा, फिर जिंदगी मेंक्या पता कब बात होगी।सामने जब हो अभी तोबात खुल करते चलो। २॥कोई संबल नहीं देगास्वयं संबल बन चलो। ।साधनों की रिक्ततासंकल्प से भरते चलो। । ३। ।योग्य जन जीता...
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JEEVAN SANGEET
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[09 Jun 2010 07:26 AM]



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