क्या पाया संग होकर...

हिंदी हैं हम.. वो हमेशा मेरे साथ हैं,कई बार मेरी गलतियों को बहुत कड़े शब्दों में इंगित करतें हैं,तब मैं सच में बहुत व्यथित हो जाती हूँ|मुझे बचपन से गलतियों के लिए सज़ा क्या फटकार भी अच्छे से नहीं मिल पाई|पिता के अतिशय स्नेह ने जहाँ मुझे जहाँ घर में एक विशिष्ट स्थान... [पूरी पोस्ट]
writer आस्था "देव"
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[14 Jun 2010 01:11 AM]

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