किताबों की दुनिया - 31
दोपहर का समय था जब डोर बेल बजी. भयंकर गर्मी में कौन चला आया सोचते जब दरवाज़ा खोला तो सामने कोरियर वाले को खड़ा पाया. जब वो बोला के साब आपके लिए कोरियर सीहोर से आया है यहाँ साइन करिए तब उसके हाथ में मैंने एक मोटा सा बण्डल देखा. ख़ुशी के मारे चीख सी निकल...
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नीरज गोस्वामी
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[14 Jun 2010 00:35 AM]



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