जिंदगी से दूर कर दिया...!

कुनाल (सिफर) आदाब,एक ताज़ा ग़ज़ल आप सबकी नज़र कर रहा हूँ... उम्मीद है आप अपनी आरा से ज़रूर नवाजेंगे...==============================बहर:- मुज़ारी मुसम्मन अखरब मख्फूफ़ महज़ूफ़ (2 2 1   2 1 2 1   1 2 2 1    2 1 2... [पूरी पोस्ट]
writer Kunaal
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[13 Jun 2010 23:34 PM]

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