बेहोशी नशा खुश्बू क्या क्या न हमारी आंखों में
यह गीत आप 17 जून के बाद सुन सकते हैं। फिलहाल शायरी का मजा लें ... बेहोशी नशा खुश्बू क्या क्या न हमारी आंखों में उलझी हैं मेरी सांसें कुछ ऐसे तुम्हारी सांसों में मदहोशी का मंजर है कुछ मीठा गुलाबी सा बिजली सी लपकती है छूने से तुम्हारी सांसों में रह रह...
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chavanni chap
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[13 Jun 2010 23:25 PM]



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