तुम्हारे प्यार की खुशबू
हम हर माह के तीन सोमवारों को उस माह के यूनिकवि की रचनाएँ प्रकाशित करते रहे हैं। उसी परम्परा मे प्रस्तुत है हमारे मई माह के यूनिकवि मृत्युंजय ’साधक’ का यह मधुर गीत, जो प्रेम-गीतों की वासंती-बगिया के एक मनोहर पुष्प सी मोहकता लिये है।तुम्हारे प्यार की...
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[13 Jun 2010 22:30 PM]



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