बहू का नगों वाला सेट [कहानी] - संगीता ...
बाजार जाने के लिए ज्योंहि मैं तैयार होकर बाहर निकली, बारिश शुरू हो चुकी थी। लौटकर बरामदे में एक कुर्सी डालकर एक पत्रिका हाथ में लेकर बारिश थमने का इंतजार करने लगी। बाजार के कई काम थे, बैंक से पैसे निकालने थे, राशन और सब्जियां भी लानी थी। कभी कभी बाजार...
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[13 Jun 2010 20:30 PM]



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