""नर्म लिहाफ" "

कुछ लम्हे "नर्म लिहाफ" सियाह रात का एक कतरा जब आँखों के बेचैन दरिया की कशमश से उलझने लगा बस वही एक शख्स अचानक मेरे सिराहने पे मुझसे आ के मिला मै ठिठक कर उसके एहसास को छुती टटोलती आँचल में छुपा रूह के तहखाने में सहेज लेती हूँ कुछ हसरतें नर्म लिहाफ में दुबके मचलने... [पूरी पोस्ट]
writer seema gupta
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[13 Jun 2010 21:37 PM]

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