यहाँ अपना तो कुछ भी नही..
बालक- मन की कोरी स्लेट परलिखा जाता है वही सबजो समाज के मन-पटल पर अंकित होबालक बड़ा होता जाता हैइस भावना के साथ किजो कुछ भी उसके मस्तिष्क में हैवह सब उसकी स्वयं की उपलब्धि हैसमाज के छोर से बह कर बालक केमस्तिष्क में संचित होंने वाले ज्ञान से बालकअपना...
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Arun Khadilkar
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[13 Jun 2010 21:44 PM]



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