देव लक्षण - देवासुर संग्राम ७

बर्ग वार्ता - Burgh Vaartaa उत देव अवहितम देव उन्नयथा पुनः उतागश्चक्रुषम देव देव जीवयथा पुनः हे देवों, गिरे हुओं को फिर उठाओ! (ऋग्वेद १०|१३७|१) देव (और दिव्य) शब्द का मूल "द" में दया, दान, और (इन्द्रिय) दमन छिपे हैं। कुछ लोग देव के मूल मे दिव या द्यु (द्युति और विद्युत वाला) मानते... [पूरी पोस्ट]
writer Smart Indian - स्मार्ट इंडियन
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[13 Jun 2010 21:03 PM]

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