उसके परस बिन मनवा है सूना

Shri Tan Singh, Badmer उसके परस बिन मनवा है सूनाजीवन में कैसी बहार रे ?अन्तर में मेरे लवना थी लागीसांचे में प्राण ढले रे ,रैन अँधेरी थी देखा ये सपनामिट गया कैसे सवेरेफिसला कदम क्या खोई है सरगमहो गई भार सितारा रे || उसके ....निराशा में चित्त का रहा ना सहारामाया को खूब जुटाई... [पूरी पोस्ट]
writer क्षत्रिय

स्व.श्री तन सिंह जी कलम से

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[13 Jun 2010 21:06 PM]

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