कबीर के श्लोक - २५

*साधना* कबीर थोरै जलि माछुली, झीवरि मेलिउ जालु॥ ऐह टोंघनै न छूटसहि, फिरि करि समुंदु समालि॥४९॥ कबीर जी कहते है कि यदि मच्छ्ली उस जगह पर है जहाँ पानी कम है तो वह ऐसी जगह पर आसानी से मछुआरे के जाल मे फँस जाती है। इसी लिए मच्छली को माध्यम बना कर कबीर जी हम से कहना... [पूरी पोस्ट]
writer परमजीत सिँह बाली
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[13 Jun 2010 20:50 PM]

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