त्रिवेणी संगम

Jogeshwar Garg जालोर में मेरे दो साहित्यिक मित्र हैं. एक अचलेश्वर "आनंद" दूसरे परमानंद भट्ट. एक "आनंद" तो दूसरा "परमानंद" ! अब समझे आप मेरे सदा आनंदित रहने का रहस्य ? हम तीनों ग़ज़लों के रसिया. ग़ज़ल कहना, पढ़ना, सुनना और सुनाना हम तीनों को बहुत अच्छा लगता है. और एक रहस्य... [पूरी पोस्ट]
writer jogeshwar garg

ghazal

views
15
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
6
[13 Jun 2010 16:08 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix