अति आत्मविश्वास, अति महत्वाकांक्षा, अति अहंकार!

चीरफाड़ कुछ मामलों में अति आत्मविश्वास को भी स्वीकार किया जा सकता है। सहन किया जा सकता है। किन्तु अति महत्वाकांक्षा की उपज अति अहंकार को कदापि नहीं। महाज्ञानी, महाशक्तिशाली, अति संपन्न रावण के अंत का कारण यही अति अहंकार बना था। उनके सोने की लंका ध्वस्त हो गई थी... [पूरी पोस्ट]
writer एस.एन. विनोद !
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[13 Jun 2010 13:27 PM]

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