तू तो यशोदा है मगर मैं कृष्ण न बना...

दिल की कलम से... जब भी मैं गिरा आँख से आँसू तेरे गिरा...मुझको जो सदा थामता आँचल का वो सिरा...शीत मे छाती से वो चिपका हुआ बचपन...वो गोद मे तेरी कहीं दुबका हुआ बचपन...मैं चल रहा समेटते यादें यूँ अनमना...तू तो यशोदा है मगर मैं कृष्ण न बना...उज्ज्वल भविष्य की हृदय में कामना... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप
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[13 Jun 2010 12:21 PM]

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