"कहीं भी अपना नहीं ठिकाना" - ऐसे भूले बिसरे गीत का ठिकाना केवल 'आवाज़' ही है

आवाज़ ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 416/2010/116 'दिल-ए-नादान' सन् १९५३ की एक ऐसी फ़िल्म थी जिसमें तलत महमूद के गाए कुछ गानें बेहद लोकप्रिय हुए थे, जैसे कि "ज़िंदगी देनेवाले सुन तेरी दुनिया से जी भर गया", "जो ख़ुशी से चोट खाए, वो जिगर कहाँ से लाऊँ", "ये रात सुहानी... [पूरी पोस्ट]
writer सजीव सारथी

sujooi chatterjee

views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
8
[13 Jun 2010 09:00 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix