धुंआ

रचना रवीन्द्र धुंआ जाने कुछ अजीब सी बात है तुममें बुरी चीजों में भी कुछ अच्छा सोच ही लेते ही अपने लिए तभी तो तुमने धुंए से सीखा ऊपर, ऊपर और ऊपर उठनाफैलना, मिलना, मशहूर होना कभी आँखों में उतरना फिर वो भला आंसू की तरह ही क्यों न हो तुम्हारी रूचि तो जलने, जलाने, धुंए और... [पूरी पोस्ट]
writer रचना दीक्षित

कविता

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[13 Jun 2010 07:13 AM]

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