...मुझे ऐ जिंदगी दीवाना कर दे

अस्तित्व उस दिन इयरफोन लगे हुए थे। 14 मिनट 21 सेकंड लंबी इस कव्वाली के आखिरी सिरे पर थी--कई-कई वार चढ़ी कोठे ते नी मैं उतरी कई-कई वारी..... न दिल चैन न सबर यकीं नू.... न भूलदी सूरत प्यारी.... आ जा सजणा.... ना जा सजणा ......तू जितीया ते मैं हारी... छेती आजा... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. अमिता नीरव
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[13 Jun 2010 06:27 AM]

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