ग़ज़ल: महका करेंगी ग़ज़लें

अशोकनामा मेरी दर्द वाली रातों की नज़र उतार देनाये गर रहीं सलामत तो महका करेंगी ग़ज़लेंफ़स्ले बहार आलम और आंसुओं का बहनाखुश मौसमों में देखना छलका करेंगी ग़ज़लेंअपने अकेलेपन में भी कभी मुतमइन रहना कोई न कुछ कहेगा पर बातें करेंगीं ग़ज़लेंदिल से जुड़े रिश्तों के लिए न दुआ... [पूरी पोस्ट]
writer अशोक जमनानी

ashok jamnani

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[13 Jun 2010 04:12 AM]

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