हे, अर्जुन मुंह खोलो
(उपदेश सक्सेना)वो कहानियाँ अधूरी जो न हो सकेंगी पूरी उन्हें मैं भी क्यूँ सुनाऊँ उन्हें तुम भी क्यूँ सुनाओ.......गज़लकार अहमद फराज़ की इन पंक्तियों को इन दिनों मन ही मन गुनगुना रहे अर्जुनसिंह की खामोशी पर देश चिंतित है. महाभारत का काल होता तो कृष्ण की मदद...
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उपदेश सक्सेना
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[13 Jun 2010 03:30 AM]



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