एक पूरा बरस : अधूरा समझौता

deehwara तुमने ठीक ही लिखा है-- न आने पायें उदासी के झोंके ,फुहारें दर्द की न पड़ें सुबह-शाम,आँखों में परछाइयाँ बादलों कीथमें केवल, जमें नहीं सावन में .--- यह सब कुछ  चाहता हूँ  मैं भीपर दोस्त,एक  पूरा बरस होता... [पूरी पोस्ट]
writer prkant

सावन

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[13 Jun 2010 01:35 AM]

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