न्याय बिकता है [मुक्तक] - कुलवंत सिंह

साहित्यशिल्पी.इन न्याय बिकता है तराजू तोल ले, हृदय की संवेदना का मोल ले, हर तरफ है रुपया आज बोलता, बेचने अपनी पिटारी खोल ले| बचे हुए भी चार गांधी चुक गये, सत्य अहिंसा पुस्तकों में छप गये, हिंदुस्तां की अस्मिता को बेचने सौदागर ही हर तरफ बस रह गये| अतिरिक्त...... [पूरी पोस्ट]
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[12 Jun 2010 20:30 PM]

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