अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे
अब आया ऊँट पहाड़ के नीचेहमें क्या मालूम था, लोगों केआशीर्वाद मिल रहते थे वे थेसब "छद्म" और थे हम आँख मीचेअब न रहेगा बांस ना रहेगी बांसुरी"घुरुवा" हट जाएगा हम तो लेते हैंविदा इस ब्लॉग की दुनिया से,मित्रों को देते हुए शुभकामनाएंपल्लवित, पुष्पित इस...
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सूर्यकान्त गुप्ता
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[13 Jun 2010 01:07 AM]



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