संतति का सच
वह तेज हवा थीतोड़ गईआखिरी पत्ता दरख़्त काशाख ने कहा-अस्फुट से- झुँझलाए स्वर मेंयह क्योंमुझसे क्या बैर तेराधीरे से मुस्काई हवाकहा सुरीले स्वर मेंसुन, इसलिए किकोंपले फूटे दोबाराबहारें आए फिर सेतुझे मोह छो़ड़ना ही होगाजीवन मोह से शुरू होता हैमोह-भंग पर अंत...
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डॉ. राजेश नीरव
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[13 Jun 2010 00:40 AM]



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