संतति का सच

नीरव वह तेज हवा थीतोड़ गईआखिरी पत्ता दरख़्त काशाख ने कहा-अस्फुट से- झुँझलाए स्वर मेंयह क्योंमुझसे क्या बैर तेराधीरे से मुस्काई हवाकहा सुरीले स्वर मेंसुन, इसलिए किकोंपले फूटे दोबाराबहारें आए फिर सेतुझे मोह छो़ड़ना ही होगाजीवन मोह से शुरू होता हैमोह-भंग पर अंत... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. राजेश नीरव
views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
3
[13 Jun 2010 00:40 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix