हिन्दी साहित्य में जातियों का दबाव- बोधिसत्व के लेख की तीसरी क़िस्त
इस लेख की पिछली कड़ियों में बोधिसत्व ग़ुलामी के दौर के साहित्य की प्रवृतियों और उनके स्रोतों की तलाश की कोशिश की थी। इस कड़ी में वह जाति की भूमिका पर कुछ सवाल खड़े कर रहे हैं। भारतीय समाज में जाति एक महत्वपूर्ण सच्चाई रही है और इससे कोई इन्कार नहीं करता।...
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अशोक कुमार पाण्डेय
कविता
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[13 Jun 2010 00:39 AM]



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