विष्‍णु नागर होने का मतलब

प्रेम का दरिया नागर जी से मेरा पहला परिचय उनके असंख्य पाठकों की तरह नवभारत टाइम्स के जरिए ही हुआ। ये मेरे लेखकीय शैशवकाल के दिन थे, जब पढ़ने की भूख कुछ भी पढ़वा लेती थी और जिन लेखकों को पत्र-पत्रिकाओं में किसी ना किसी रूप में पढ़ता रहा, उनमें नागर जी अहम थे। उन दिनों मुझे... [पूरी पोस्ट]
writer प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi

साहित्यकार

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[12 Jun 2010 23:50 PM]

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