साहित्य सर्जक

साहित्य सर्जक मित्रों यह गजल नही है जैसा मैंने पहली पोस्ट में कहा है यह "नव गीतिका "है पावस ऋतू प्रारम्भ हो रही है इस लिए बदल बूँदें बरसात व फुहार से ही इस का साधारणीकरण होता है ये तत्व ही सहृदयी को पावस का अहसास कराते हैं इसी पर यह नव गीतिका है ध्यान से निकला करो... [पूरी पोस्ट]
writer vedvyathit
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[12 Jun 2010 23:36 PM]

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