शादी के रंगारंग महफिल से लौटे हैं, अब प्रवचन…

अधूरा सपना (शादी ब्याह का माहौल ज़रा अलग तरह का होता है, श्रृंगार रस से ओतप्रोत… मेरी आज की बकवास में रस तो नहीं है लेकिन रसगुल्ले हैं…जो कि शादी ब्याह के अवसरों पर लगभग हर रोज़ ही दिख जाता है…… दिखता भर है… खाने के लिए बड़ी मारा मारी है… :) ) बहुत समय पहले, एक नगर... [पूरी पोस्ट]
writer Manish
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[12 Jun 2010 22:31 PM]

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