प्रेम, अंहकार और टॉनिक

स्वार्थ हजारों की भीड़ में भी दूसरे हैं इस कारण अपने होने का अहसास तो रहता है परन्तु तब भी वजूद के होने की बात गहरे में नहीं पनप पाती| यह तो तभी पता चलता है जब हजारों की भीड़ में से कोई एक आकर हाथ थाम लेता है| पहली बार कोई हमारे अपने कारण पास [...]... [पूरी पोस्ट]
writer स्वार्थ

poetryLoveahamkarego

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[12 Jun 2010 19:53 PM]

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