जिन्दगी......... एक नदी
जिन्दगी एक नदी की तरह है जो बस चलती जाती है कभी तेज तो कभी आहिस्ता1 नदी की तरह जिन्दगी भी कभी रुकती नही, रुक जाते हैं तो बस इंसान शायद हमारी फितरत ही ऐसी है कि हमारे जज्बात किनारे की रेत की तरह पानी के बहाव मे नही बह जाते अपितू नदी के सीने मे उभरी शिला...
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सुमन'मीत'
जीवन दर्शन
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[12 Jun 2010 15:16 PM]



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