रोहतांग : अपने - अपने हिस्से का हिमालय

कर्मनाशा यात्रा की थकान व खुमारी के उतरने के बाद स्मृतियों के उतराने और उन्हें उलीचने -समेटने - सहेजने के क्रम में मोबाइल और कैमरे से ली गईं तस्वीरों को एडिट करने की जुगत के बीच आज दोपहर के आलस्य में कुछ लिखा गया है। पता नही ये कवितायें हैं या कवितानुमा ट्रेवेलाग... [पूरी पोस्ट]
writer sidheshwer

कविता

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[12 Jun 2010 14:14 PM]

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