रुपसिंह मिस्त्री

कस्बे का कवि... बहुत प्यार और पसीने सेउसने बनाया हैयह शाला भवनउसका नाम भी लिखा हुआ हैसंगमरमर के एक छोटे-से टुकड़े पर -रूपसिंह मिस्त्रीलाल पठार, बासौदासोचता हूँ मैंअगर होता शाहजहाँतो ज़रूर पूछताउस गुस्ताख़ का नामजिसने संगमरमर परखुदवाया हैइस कारीगर का नामसंगीन ज़ुर्म है... [पूरी पोस्ट]
writer मणिमोहन
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[12 Jun 2010 12:56 PM]

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