नारकीय जीवन से जूझ रही है श्रमिकों की आधी दुनिया
(लेखक जेएनयू से जुड़े हुए हैं और यह उनका लेख दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में छप चुका है। उनकी सहमति पर इस लेख को यहां दिया जा रहा है।)संदीप कुमार मीलएक अनुमान के मुताबिक विश्व के कुल काम के घंटों में से महिलाएं दो तिहाई घंटे काम करती है, लेकिन वह...
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mazdoornama
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[12 Jun 2010 12:36 PM]



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