छोरियां क्या से क्या हो गयी............

योगेंद्र मौदगिल ज़िन्दगी इक व्यथा हो गयी.प्रीत की दुर्दशा हो गयी.देखते, देखते, देखते...ज़िन्दगी क्या से क्या हो गयी.आया तूफ़ान महंगाई का,सारी खुशियां हवा हो गयी.पीड़ा इतनी बढ़ी अंततः,कुल दिनों की दवा हो गयी.मूं छिपाती फिरै मुफ़लिसी,लो अमीरी अना हो गयी.देख टीवी को अम्मा... [पूरी पोस्ट]
writer योगेन्द्र मौदगिल

ग़ज़ल

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[12 Jun 2010 11:33 AM]

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