बहका दिया किसी ने
बहका दिया किसी ने पिलाकोई जाम मुझे अरमानों का ||राह के काँटो में उलझ गया मैं तो आँख लगी देखा पिछड़ गया मैं तो किसने बताया पंथ मुझे युग युग के परवानों का ||देखे मैंने सांचे रे जिन्दगी में ऐसेआंसुओं को पूछा तो मुस्कराये कैसे जितना भुलाया याद रहा ,कर्जा इन...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[12 Jun 2010 10:39 AM]



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