क्या आप ढूंढ़ सकते हो ....
क्या जीवन था....जब चलती चक्की घोर घोर, सब बोले हो गयी भोर भोरफिर चून पीस कर चार किलो, गिड़गम पर रखा दूध बिलोनेती से जब जब रई चली फिर छाछ बटी यूं गली गलीयूं बांट बांट कर स्वाद लिया, बचपन को हमने खूब जियाक्या जीवन था वो ता...ता...धिनमैं ढूंढ़ रहा हूं वो...
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पवन *चंदन*
वो पल छिन
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[12 Jun 2010 09:30 AM]



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