टापू
जानती हूं मैंसागर हो तुमअथाह, विस्तृत, उन्मुक्तऔर मेरी इयत्ताएक नौका भर हैजानते हो तुम!उभचुभ सांसों को संभालेढूंढती हूं मैंकोई टापूप्रेम का, विश्वास काजहां ले सकूं मैंचंद सांसेसुकून की।- सीमा स्वधा...
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सौरभ के.स्वतंत्र
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[12 Jun 2010 07:39 AM]



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