तू हासिल की किता
पढ़ पढ़ किताबां इल्म दियां ते तूं नाम रख ल्या काज़ीमक्के-मदीने जा आया ते तूं नाम रख ल्या हाज़ीबुल्ले शाह तू हासिल की किता जे तूं यार न रखेया राजी...सूफी शायर बुल्ले शाह के लिए गुरु ही सब कुछ थे. उन्होंने गुरु को ही यार कहा है. गुरु को उन्होंने अपना पति माना...
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आमीन
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[12 Jun 2010 07:09 AM]



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