धूप में पेड़ भर छाँव प्यास में घूँट भर जल

कबाड़खाना 'वे जो लकड़हारे नहीं हैं' सुरेश सेन निशान्त की कविताओं का संग्रह है जो अंतिका प्रकाशन से इसी साल २०१० में आया है. निशान्त की कविताओं की सहजता ने हिन्दी कविता के एक बड़े हिस्से को ओर अपनी ओर खींचा है.उनकी कविताओं की दुनिया में कोई 'दूसरा' संसार नहीं बल्कि... [पूरी पोस्ट]
writer sidheshwer
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[12 Jun 2010 05:00 AM]

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