जीवन सबका पानी है

परिकल्पना बचपन में ....पहली बार हमने जिस कविता को याद किया वह थी- "मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है...!" यदि अपने जीवन को टटोला जाए तो इस कविता को ऐसे पढ़ा जा सकता है- " मेरा बेटा राजा, मेरी बेटी रानी है, जीवन सबका पानी है । "जल-शब्द ही जीवन में रोमांच कर... [पूरी पोस्ट]
writer रवीन्द्र प्रभात

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[12 Jun 2010 04:23 AM]

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