जीते रहो!!!
हे! सहोदर! तुम वही ना जो रहे उसी उदर में जिसमें कि मै उसी पदार्थ से पोषित जिससे कि मै, फिर क्यों नहीं कोमल भावनाएं तुम्हारी जैसे कि मेरी, फिर क्यों कठोर शब्द तेरे क्यों नहीं मेरे, क्यों मैं पल पल आहत तेरे बोलों से...
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वेदिका
वेदिका
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[12 Jun 2010 03:25 AM]



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