कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात
खुद से नाराज हो मिलेगा क्याखुद से नाराज हो मिलेगा क्या,हो के बरबाद यूँ मिलेगा क्या ।अश्क कहते रहे जमाने से,सिला हमको कोई मिलेगा क्या ।दिल ने ताउम्र ठोकर खाई है,ठीयाँ इसको कभी मिलेगा क्या । ज़ख्मों से रिश्ता हो ही गया,आराम मरहम से मिलेगा क्या ।प्यास...
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©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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[09 Jun 2010 07:24 AM]



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