ओ मेरे पिता!
ओ मेरे पिता! तुम्हाराअंश हूँ मैं सम्पूर्णमां के गर्भ में रचातुमने मुझे अपने लहू से तुमसे मुक्त कैसेहो पाऊंगा कभीकैसे वापस लौटा सकूँगा तुझेउसका अंश भी जोतुमने दिया है मुझे सब कुछ निछावर करके भीअपने आंसुओं के साथरखा तुमने मुझेजो करुणा और...
[पूरी पोस्ट]
डा.सुभाष राय
subhash
17
2
0
2
8
[12 Jun 2010 02:35 AM]



Shuffle








