बंजर होने के ठीक पहले

मौन के खाली घर मे-                                       ओम आर्य चूहे दौड़ते थेउनके पीछे कुछ और चूहे दौड़ते थेऔर उनके पीछे कुछ औरउनकी दौड़ पेट तक हीं सीमित नहीं थीवे दिमाग की नसों तक पहुँच चुके थे और पूरे वक़्त दौड़-दौड़ कर उँगलियों से वासनाएं खुजाने में लगे रहते थे वे अलग-अलग कई बिल बनाते थे और नए इजाद किये तरीकों से... [पूरी पोस्ट]
writer ओम आर्य
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[12 Jun 2010 01:20 AM]

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