झंकृत
'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटता कवि कुलवंत सिंह का गीत 'झंकृत'. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... झन - झन झंकृत हृदय आज हैवपु में बजते सभी साज हैं ।पी आने का मिला भास हैमिटेगा चिर विछोह त्रास है ।मंद - मंद मादक बयार...
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अभिलाषा
कुलवंत सिंह
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[12 Jun 2010 00:35 AM]



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