दोस्ती देने का नाम है -- तुमने कहा था

deehwara स्वप्न पलकों पर तिरा करते थे जो अक्सर ,कदम थके-थके जो बहक-बहक जाते थेमुड़ने के लिए चलते-चलते,पुरवा पवन वह ओस-भीगी सिहरा जाती थी सीला मन जो,रीत गये सभी कहो तो क्यों !!सिर पटक-पटक जाती है बिखर लहर ,फूट-फूट जाते हैं इस पहाड़ी नदी... [पूरी पोस्ट]
writer prkant
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[12 Jun 2010 00:17 AM]

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