चिड़ीनिहार

निर्मल-आनन्द शहरों में आज भी बहुत सी चिड़िया रहती हैं, आती-जाती हैं, गाती-चिल्लाती हैं। मगर हमारे पास उन्हे देखने-सुनने के लिए आँख-कान नहीं बचे हैं। ट्रैफ़िक और टीवी के शोर में किस के पास चिड़िया को देखने का धीरज और स्थिरता है। बिना स्थिरता के आप चिड़िया नहीं देख सकते!जब... [पूरी पोस्ट]
writer अभय तिवारी
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[11 Jun 2010 23:21 PM]

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