स्वाति बूँद
पीयूषवर्णी मेघ नेद्रवित होएक बूँद टपकाई सहसाकदली, सीप और भुजंग नेतुरंत अपनामुँह खोलालेकिनबूँद की कोई और मर्जीवह गिरीसाँवली गोरी केउत्तुंग वक्ष पर-गोरी सिहर कर लरज गई,गंध कपूर कीमोती की शुभ्रताऔर जहर-सी तीव्रता, तीक्ष्णताउस बूँद ने पाईऔर हो गई...
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डॉ. राजेश नीरव
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[11 Jun 2010 23:00 PM]



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