दान का आनन्द
एक राजा थे। वह बड़े ही उदार थे। दानी तो इतने कि खाने-पीने की जो भी चीज होती, अक्सर भूखों को बांट देते और स्वयं पानी पीकर रह जाते। एक बार ऐसा संयोग हुआ कि उन्हें कई दिनों तक भोजन न मिला। उसके बाद मिला तो थाल भरकर मिला। उसमें से भूखों को बांटकर जो बचा, उसे...
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Pradeep Kathait
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[11 Jun 2010 23:02 PM]



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